वा­रा­ण­सी (अं­ग्रेज़ी: Vārāṇasī, हि­न्दु­स्ता­नी उच्चा­रण: [ʋaːˈɾaːɳəsiː]  (Speaker Icon.svg सुनें)), जिसे बनारस, उर्दू: بنارس, Banāras [bəˈnɑːɾəs]  (Speaker Icon.svg सुनें)) और काशी, उर्दू: کاشی, Kāśī [ˈkaːʃiː]  (Speaker Icon.svg सुनें)) भी कहते हैं, गंगा नदी के तट पर भारत के उत्तर प्र­देश राज्य में बसा शहर है। इसे हि­न्दू धर्म में सर्वा­धिक पवि­त्र शहर माना जाता है और इसे अवि­मु­क्त क्षे­त्र कहा जाता है। [च][छ][३][४][५][६] इसके अलावा बौद्ध एवं जैन धर्म में भी इसे पवि­त्र माना जाता है। यह संसार के प्रा­ची­न­तम बसे शहरों में से एक और भारत का प्रा­ची­न­तम बसा शहर है। [७][८]

काशी नरेश (काशी के महा­रा­जा) वा­रा­ण­सी शहर के मुख्य सा­ं­स्कृ­तिक सं­र­क्षक एवं सभी धा­र्मिक क्रि­या-कला­पों के अभि­न्न अंग हैं।[९] वा­रा­ण­सी की सं­स्कृ­ति का गंगा नदी एवं इसके धा­र्मिक मह­त्त्व से अटूट रि­श्ता है। ये शहर सह­स्रों वर्षों से भारत का, वि­शे­ष­कर उत्तर भारत का सा­ं­स्कृ­तिक एवं धा­र्मिक के­न्द्र रहा है। हि­न्दु­स्ता­नी शा­स्त्रीय संगीत का बनारस घराना वा­रा­ण­सी में ही जन्मा एवं वि­क­सित हुआ है। भारत के कई दा­र्श­निक, कवि, लेखक, सं­गी­त­ज्ञ वा­रा­ण­सी में रहे हैं, जि­न­में कबीर, रवि­दास, स्वा­मी रा­मा­नंद, त्रै­लंग स्वा­मी, मुंशी प्रे­म­चंद, जय­शं­कर प्र­साद, आचा­र्य रा­म­चं­द्र शुक्ल, रवि शंकर, गि­रि­जा देवी, पंडित हरि प्र­साद चौ­र­सि­या एवं उस्ताद बि­स्मि­ल्लाह खां कुछ हैं। गो­स्वा­मी तु­ल­सी­दास ने हि­न्दू धर्म का परम-पू­ज्य ग्रंथ रा­म­च­रि­त­मा­नस यहीं लिखा था और गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम प्र­व­चन यहीं निकट ही सा­र­नाथ में दिया था। [१०]

वा­रा­ण­सी में चार बड़े वि­श्व­वि­द्या­लय स्थित हैं: बनारस हि­न्दू वि­श्व­वि­द्या­लय , महा­त्मा गांधी काशी वि­द्या­पीठ, से­ं­ट्रल इं­स्टी­ट्यूट ऑफ हाइयर टि­बे­टि­यन स्ट­डीज़ और सं­पू­र्णा­न­न्द सं­स्कृत वि­श्व­वि­द्या­लय । यहां के नि­वा­सी मु­ख्य­तः का­शि­का भो­ज­पु­री बोलते हैं, जो हि­न्दी की ही एक बोली है। वा­रा­ण­सी को प्रा­यः मं­दि­रों का शहर, भारत की धा­र्मिक रा­ज­धा­नी, भगवान शिव की नगरी, दीपों का शहर, ज्ञान नगरी आदि वि­शे­ष­णों से सं­बो­धित किया जाता है।[११]

प्र­सि­द्ध अम­री­की लेखक मार्क ट्वेन लिखते हैं: "बनारस इति­हास से भी पु­रा­तन है, परं­प­राओं से पु­रा­ना है, कि­ं­व­दं­ति­यों(ली­जे­न्ड्स) से भी प्रा­चीन है, और जब इन सबकों एकत्र कर दें, तो उस सं­ग्रह से भी दो­गु­ना प्रा­चीन है।"[१२]


